Saturday, 3 April 2021

तेरी नज़रें...

 धार तेरी तीखी नजरों की...
कि भाप जाते हैं 
नज़र मिलाने से पहले।

कभी तेरी उठती नज़रें...
कभी तेरी झुकती नज़रें...
उठाने और 
गिराने का 
इरादा साथ रखते हैं...।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र - साभार गूगल

18 comments:

  1. उठा कर गिराना, गिरा कर उठाना, गजब ढा गया

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (04-04-2021) को   "गलतफहमी"  (चर्चा अंक-4026)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

    ReplyDelete
  3. बहुत खूब लिखा सधु जी 👌👌👌हार्दिक शुभकामनाएं🙏🙏

    ReplyDelete
  4. धार तेरी तीखी नजरों की...
    कि भाप जाते हैं
    नज़र मिलाने से पहले।
    प्रेमालंकृत सुंदर पंक्तियाँ। ।।।। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया सधु जी।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर।

    ReplyDelete

मेरा लहज़ा

  परवरिश और लहज़े में  अन्योन्याश्रय का संबंध है। परवरिश मानो पानी  जैसा पिए वैसा लहज़ा/वैसी वाणी। यह लहज़ा ही है जो  आपको  किसी...