Monday, 17 May 2021

हमने मौत से लड़कर जीवन जीतना सीखा है।।

उड़ान हौसलों की 
ना हो कभी कम 
इस आसमां को पी जाएं
भर लें बाजुओं में 
हवाओं के दम ।।

 ऊंची लहर तुम 
उठो और ऊँचा  
गिरो तो चट्टान बन 
भर लूं मैं तुम्हें हमदम।।

कि चलो क्षितिज पार 
मंज़िल है वहाँ 
जहाँ दूर-दूर  सागर से 
आसमां मिलता है।।

अब क्या  खौफ़... किसी का
हमने मौत से लड़कर
जीवन जीतना सीखा है।।

आशा महासाध्वी कदाचित् मां न मुञ्चति।

।।सधु चन्द्र।। 

Monday, 26 April 2021

एक अनुभव कोरोनावायरस के नाम

पिछले एक साल में कई कविताएँ व लेख लिख डाले। पता नहीं कितनों को जागरूक कर पाई अपने शब्दमयी जीवन से। पर, जब... वास्तविक जीवन में सामना हुआ उस भयावह आत्मा से, लील जाने वाले दैत्य से, तो मानो जागरूकता के लिए शब्द नहीं बचे थे। 
शरीर  निस्तेज था।
मन मानो शून्य में। 

मैंने महसूस किया कि मैं सबकी अपनी हूँ पर मेरे भीतर जिस भयावह प्रेत आत्मा का वास हो गया है वह मेरे आस-पास भटकने वाले मेरे अपने लोगों को, अपनी एक फूक से अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

बस एक चीज अनुभव कर भावुक हो उठी कि मेरे बाद बच्चों के खान-पान का ख़्याल कौन रखेगा !!!!
और झर-झर अश्रुधारा फूट पड़े।
मैं सकारात्मक प्राणी हूँ और कोविड के सकारात्मकता से जूझ रही हूँ  पर शीघ्र ही सकरात्मकपूर्वक इस पर  विजय प्राप्त करुंगी।
 ।।सधु चंद्र।।

Tuesday, 13 April 2021

अनेकता में एकता का अनूठा दिनांक 14 अप्रैल


अनेकता में एकता का अनूठा दिनांक 14 अप्रैल 
अनूठा दिनांक 14 अप्रैल अनेकता में एकता का पर्व है जो कि वैशाखी एवं अन्य नामों से प्रचलित है तथा हिन्दुओं, बौद्ध और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है। 
वैशाख के पहले दिन पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक क्षेत्रों में बहुत से नववर्ष के त्यौहार जैसे 
नववर्ष -कश्मीर (कश्मीरी पंडित) 
बैसाखी - पंजाब 
सतुआन- बिहार
जुड़शीतल- मिथलांचल(बिहार)
पोहेला बोशाख/नबा बर्ष- बंगाल 
बोहाग बिहू- असम
विशु-केरल
पुथंडु-  तमिलनाडु 
यूगाडी- कर्नाटक 
 उगाडी- आन्ध्र प्रदेश 
कोंकण - सम्वत्सर पर्व
आदि मनाए जाते हैं।क्योंकि इस दिन सूर्य, मीन से मेष राशि में प्रवेश करता है। इस कारण इस दिन को मेष संक्रान्ति भी कहते है। इसी पर्व को विषुवत संक्रांति भी कहा जाता है।
14 अप्रैल के इन पर्वों के पीछे कृषि प्रधान देश के रबी फसल की कटाई है।जब खेतों में रबी की फसल पककर लहलहाती हैं,तो देश के कोने-कोने में बसे किसानों के मन में फसलों को देखकर खुशी मिलती और वे अपनी खुशी का इजहार बैसाखी एवं अन्य पर्व के रूप में  मनाकर करते हैं। निश्चय ही या अनेकता में एकता का प्रतीक है।

 इस पर्व को  उत्तर भारत के लोग बेहद  हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इसे सत्तू संक्रांति या सतुआन भी कहा जाता है।
 

बैसाखी

जुड़ शीतल 

पोहेला बोशाख/नबा बर्ष
बोहाग बिहू

पुथंडु
की शुभकामनाएँ ।


इसके अतिरिक्त संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष,बहुज्ञ   'ज्ञान का प्रतीक' (सिम्बॅल ऑफ नॉलेज) डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर के  जन्म दिवस के रूप में भी यह 14 अप्रैल मनाया जाता है।
बाबा अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें सादर नमन 🙇। 

।।सधु चन्द्र।। 
चित्र साभार -गूगल 

Thursday, 8 April 2021

मेरा लहज़ा

 
परवरिश और लहज़े में 
अन्योन्याश्रय का संबंध है।

परवरिश मानो पानी 
जैसा पिए वैसा लहज़ा/वैसी वाणी।

यह लहज़ा ही है जो 
आपको 
किसी से दूर ले जाता है ।
यह लहज़ा ही है जो 
आपको 
किसी के करीब लाता है ।।

लोग पसंद करते हैं 
नापसंद करते हैं। 
करीब होते हैं या 
दूर से नमस्कार करते हैं ।।

लहज़ा ही है 
जो ज़ेहन में बस जाता है
चित्रकार के उकेरे चित्र सा 
पन्ने से चिपक जाता है।।

मेरा लहज़ा  ही था
जो उसकी
ज़हन में बस गया ।
बदले में जो चंद शब्द
उसने दिए
ताउम्र मेरी कलम में
वह कविता बन
बस गया।।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र- साभार गूगल

Saturday, 3 April 2021

तेरी नज़रें...

 धार तेरी तीखी नजरों की...
कि भाप जाते हैं 
नज़र मिलाने से पहले।

कभी तेरी उठती नज़रें...
कभी तेरी झुकती नज़रें...
उठाने और 
गिराने का 
इरादा साथ रखते हैं...।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र - साभार गूगल

Wednesday, 31 March 2021

स्वाभिमान होना चाहिए न कि अभिमान होना चाहिए ।

विनम्रतापूर्ण ज्ञान से ही 
होता मानव ज्ञानी ।
विनय-विवेक-नम्रता बिन 
कहलाता अभिमानी ।।
अतः ....
स्वाभिमान होना चाहिए 
न कि अभिमान होना चाहिए ।

"प्रशंसा" सिर झुका कर 
विनम्रता से स्वीकार हो। 
किंतु... आलोचना पर भी 
गंभीरता से विचार हो ।

क्योंकि!!!
आलोचना...
परिष्कृत स्थान देती है ,
तभी श्रद्धा...
ज्ञान देती है ।
नम्रता...
मान देती है एवं 
योग्यता...
आपको एक स्थान देती है।।

।।सधु चन्द्र।।

Monday, 15 March 2021

क्रोध संतप्त, हृदय विरक्त

क्रोध संतप्त, हृदय विरक्त 
पर न उढे़ल, 
शब्दों से तू रक्त।
अधरों को दे विराम
नयनों का बन भक्त।। 

शिक्षालय है देह तेरा 
हो शिक्षा विषय अनिवार्य
पाखंड,आडंबर विषयों का
सदा ही कर परिहार्य।।

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र-साभार गूगल

Wednesday, 3 March 2021

अंतर्मन को छूना, प्रहार से भारी है

हथौड़ी के बार-बार प्रहार करने पर
ताला खुलता नहीं टूट जाता है। 
 निरंतर वार पर जब
 अभिमानी ताला न खुला 
तब हथौड़ी ने, 
चाबी के पास जाकर पूछा...
तुम ऐसा क्या करती हो!!!
जो कि मेरे प्रहार से संभव नहीं!!!
चाबी ने कहा...
 तुम बाह्य प्रहार करते हो पर मैं...
 अंतर्मन को छूती हूँ।

अंतर्मन को छूना, प्रहार से भारी है।
।।सधु चंद्र।।

चित्र-साभार गूगल

हे मन उठ !

स्वारथ सकल पूरित शोरगुल-कोलाहल।
धैर्य मन पीता
नितदिन हलाहल।।
हे मन उठ !
चल क्रान्ति ला।
लोहे को लोहे से काट
जग में शान्ति फैला।।

प्रातर्वन्दन 🙏🙏🙏🙏💐


।।सधु चन्द्र।। 

Sunday, 28 February 2021

आर्थिक निर्भरता क्यों?

आर्थिक रूप से कमजो़र होना ही 
महिला के लिए अभिशाप है।

स्त्री विमर्श से बाहर निकलना 
इतना आसान नहीं...
यह अच्छा है वह बूरा 
काम करने की जरूरत क्या है!!! 
पति की इनकम तो इतनी अच्छी है 
तुम्हें क्या जरूरत आन पड़ी !!!
किस चीज कमी है!! 
अपने घर का ख्याल रखो।

वह सब तो सही है ...
पर... एक महिला ही समझ सकती है 
महिला के दिल का हाल...
जब जरूरत पड़ती है तो 
फैलाना पड़ता है हाथ।

भाई साहब! 

बिना वेतन के 
24 घंटे का काम नहीं दिखता 
बस... क्या करती हो!!!
यही ध्वनि कान में बार-बार है गूंजता।।


।।सधु चन्द्र।।

Friday, 26 February 2021

समस्या

दुनिया के साथ समस्या यह है कि 
बुद्धिमान लोग संदेह से भरे हैं जबकि
मूर्ख लोग आत्मविश्वास से।
: वुकोव्स्की :

अब आपकी समझ आपके हाथ  जो समझो😊

Tuesday, 23 February 2021

कारपोरल पनिशमेंट वर्जित

मनुष्य और पशु में 
बड़ा अंतर है 
हिंसा-अहिंसा का।

जहाँ मनुष्य वाणी से 
भावनाओं को अभिव्यक्त करता है, 
वही पशु हिंसा द्वारा ।

सुना है आपके पास पर्याप्त डिग्रियाँ हैं
और मनुष्य के रूप में भी 
अवतार लिया है आपने 
जो कि सृष्टि का 
बुद्धिमान जीव कहलाता है ।

यदि पेड़-पौधों के पास 
पर्याप्त फल हो तो वे 
लदकर झुक जाते हैं 
समर्पित हो जाते हैं ।

कुएं में पर्याप्त पानी हो तो वह 
आपकी पहुंच तक आ जाता है ।
नदियों में पर्याप्त जल हो तो 
खेत-खलिहान लहलहाने लगते हैं।

ख़ुद को योग्य समझने वाले 
क्या लाभ आपके ज्ञान का !!!
जब अंधकार में 
प्रकाश न पहुंचे
और बच्चे आतंकित हों आपके कोप से...।

शिक्षक रोल मॉडल होते हैं उनका  एक ही उद्देश्य और एक ही लक्ष्य होना चाहिए बच्चों में ज्ञान बांटना न कि शारीरिक दंड बांटना। ज्ञान बढ़ाइए कोप नहीं।

।।केवल अपवाद रुपी शिक्षक के लिए।।

।।सधु चंद्र।।
 चित्र - साभार गूगल




Sunday, 21 February 2021

जय-जय-जय चापलूस महाराज

जय-जय-जय चापलूस महाराज 
स्वाभिमान ना आता तुमको रास।
पिछल्ले बने घूमते तुम 
नहीं रुकता कभी 
तुम्हारा कोई काज ।
गुडबुक्स में ऊपर रहते तुम 
बॉस करता तुम पर नाज़ ।

सिक्के के दोनों पहलू तुम्हारे 
चापलूसी,व्यवहार-कुशल 
दोनों चित पट नारे-वारे ।

शहद में 
डूबो-डुबोकर निकलती 
वाणी तुम्हारी ।
हर पक्ष में आती 
हामी तुम्हारी ।

स्वाभिमान का परित्याग ।
स्वार्थ ही परमार्थ ।
अपना उल्लू सीधा करने में ...
तलवे चाटना नहीं लगता भारी।

हम तो देते तुम्हें एक ही नाम ...
बिन पेंदी का लोटा
जो किसी का ना होता 
बस...
ढलमलाता 
एक कोने से दूसरे कोने तक 
जब तक पूर्ति ना हो जाए स्वार्थ।

ऐसे लोग धूर्त,पाखंडी,धोखेबाज होते हैं।।

।।सधु चन्द्र।। 
चित्र - साभार गूगल

Monday, 15 February 2021

सर्द ओस में सिमटे ख़्याल तेरे लिहाफ से निकल बाहर जाते नहीं...

सर्द ओस में सिमटे ख़्याल तेरे 
लिहाफ से निकल बाहर जाते नहीं ।

 लिफाफे के बाहर जो पड़ा है ख़त 
उस ख़त में ऐसा तो कुछ लिखा  नहीं ।
जैसा कि हाथ फेर महसूस.... किया मैंने ।

बहुत रहस्यमयी है 
यह टुकड़ा कागज़ का...।
पता नहीं... 
जो मैंने सोचा 
वह तुमने कहा ! 
या कहा नहीं !

सर्द ओस में सिमटे ख़्याल तेरे 
लिहाफ से निकल बाहर जाते नहीं ।

*****************************************

बहुत ख़ूबसूरत,तिलस्मी है 
झरोखा तेरी यादों का ।
भले बंद हो पलके मेरी 
पर यादों का सिलसिला जाता नहीं ।
कपड़ों को तह करते-करते 
यादों की तहे खुल जाती हैं
और कब तह हो जाती हैं यादें तुम्हारी  
कपड़ों की तहों में 
पता नहीं...!

।।सधु चन्द्र।। 
चित्र - साभार गूगल 

Tuesday, 9 February 2021

धैर्य,क्षमा हो कब तक!!!

धैर्य,क्षमा हो कब तक!!!
अनजाने में हो गलती जब तक ।
किंतु धृष्टता ना हो स्वीकार,
जब जानकर करे कोई 
गलती बार-बार।।

भले... गहना बल का है क्षमा
किन्तु
नहीं हर बार।
अन्त होना अनिवार्य तब
जब शिशुपाल करे
अति... जब-तब।


।।सधु चन्द्र।। 

Saturday, 6 February 2021

एक आंतरिक द्वंद्व ... और मैं कवि बन जाता हूँ

 एक आंतरिक द्वंद्व , 
युद्ध अंदर
मस्तिष्क और हृदय के बीच निरंतर।

एक बढ़ता अविरल
शांति-पथ पर 
किन्तु, एक पुनः 
किसी प्रेम-विश्वास के पथ पर ।

कभी अनुभव होता निर्बल
तो कभी दुगना सबल ।
कभी भारी और भारी 
रात्रि सताती
तो कभी चांदनी का स्पर्श 
हल्का कर, थकान मिटाती ।

कभी अधरों पर फीकी मुस्कान 
तो कभी भीतर पीड़ा की खान ।

कभी सूखी धरती 
तो कभी भीगा आसमान ।
कभी आत्मा का तत्व शुष्क 
फिर भी सजल नैनो का 
न होता सत्व विलुप्त ।

कभी कोमल हृदय 
तो कभी हृदय प्रस्तर।

पर, कभी ऐसा भी होता है जब...
सुखी आँखें, होठों पर खींची मुस्कान
किन्तु भीगा मन, 
मुखमौन 
चीख- चीख कर करता बखान...
तब मैं कवि बन जाता हूँ...।

जब मेरे भीतर की उष्मा तेज होती है 
जब मेरे भीतर अतीत 
वर्तमान से द्वंद्व  करता है 
जब सुकोमल मन पर कोई 
हथौड़ी की चोट करता है 
तब मैं कवि बन जाता हूँ।। 

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र - साभार गूगल 

Wednesday, 3 February 2021

चलो एक कहानी लिखें ...संवेदनाओं को अपनी ज़ुबानी लिखें...

 सुनो...!
चलो एक कहानी लिखें 
हाट बाज़ार से इतर
संवेदनाओं को
अपनी  ज़ुबानी लिखें।

अक्षर की कटारों में
समय की धार लिखें।
छांव के नाम लिखें...
इज़हार-ए-मुहब्बत धूप का।
ज़रूरत आन पड़ी तो...
आग को आधार लिखें।

चलो एक कहानी लिखें 
संवेदनाओं को
अपनी  ज़ुबानी लिखें।

बर्तनों की ठनठनाहट 
सितारों की जगमगाहट को
न अशरफ़ियो के नाम लिख दें ।

ये जो कुहासा छाया है  
महामारी का ...!!!
उसे चीरते ...
सर्द फाहों पर
अपनी संगत की 
दिवानगी लिख दें ।

चलो एक कहानी लिखें 
संवेदनाओं को
अपनी  ज़ुबानी लिखें।

कुछ तुम कहो 
कुछ मैं ।
कुछ तुम सुनो 
कुछ मैं ।
तुम लिखो 
कुछ मैं ।
ढलते सूरज की तरह 
ज़िन्दगी के भोर की...
रवानगी लिख दें ।

चलो एक कहानी लिखें 
संवेदनाओं को
अपनी  ज़ुबानी लिखें।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र  - साभार गूगल

Sunday, 31 January 2021

एक वक़्त था कि प्रेम-पत्र लिखे जाते थे ...

एक वक़्त था कि 
प्रेम-पत्र लिखे जाते थे ।
संकोचवश
मन की बात जो
अधरों तक ना आ पाती 
उसे शब्दों में पिरोए जाते थे।

सुख-दुख आनन्द-पीड़ा 
शब्दों में उकेरे जाते थे ।

यह प्रेम-पत्र ही था 
जिसे वापस मांगते समय 
प्रेमिका 
फूट-फूट कर रोया करती थी ।
और...
यह प्रेम-पत्र ही था जिसे 
गंगा में प्रवाहित कर 
प्रेमी 
आश्वस्त करता 
अपने पावन प्रेम को।


आज की भांति उस समय भी 
हर विषय के गुरु हुआ करते थे ।
यद्यपि पत्र का प्रारूप होता है ।

इसे अक्षरस: सत्य करता 
इसका स्वरूप होता है ।
इसलिए...
एक स्कूल,एक कोचिंग ,एक कॉलेज के
सारे प्रेम-पत्र लगभग 
एक ही प्रारूप में 
एक ही गुरु के मार्गदर्शन में 
लिखे जाते।
कभी कविता 
कभी लेख 
कभी आवेदन को 
जज्बातों की ओखली में कूट कर 
रंगीन स्याही से लबालब रसोई में परोसे जाते।

सिलेक्शन रिजेक्शन के 
कई चरण 
इस दरमियां आते।

यह प्रेम पत्र ही था जो 
असफल प्रेमी को 
सफल शायर बना दिया करता था 
वरना... 
प्रेम की इतनी मजाल कि ...
टूटे दिल का मुशायरा कर ले।।

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र -साभार गूगल 

Friday, 29 January 2021

दूसरी पारी अब भी है शेष ...

अमावस्या की रात 
जो चल रही है ...
ना मशाल लेकर 
राह दिखाएगा कोई ।

एक ज्योतिपुंज जो 
जल रही है भीतर तेरे 
मझधार में बन पतवार
पार लगाएगी वही ।

तू चल ...
ना रूक...
बेड़ियों,जंजीरों को तोड़ 
भारी पैर से अटल हो 
मंजिल को अपनी ओर मोड़ ।

तू शूल में भी फूल खिलाने में सक्षम
प्रतिकूल को भी अनुकूल बनाने में सक्षम

क्या हुआ !!!
जो पहली पारी रुक गई ...
दूसरी पारी अब भी है शेष ।
जो होगा तेरे लिए विशेष।।


।।सधु चन्द्र ।।

चित्र - साभार गूगल 

Monday, 25 January 2021

जागो!हे ! हिंद वासियों,पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

जागो!
हे ! हिंद वासियों,
पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

कुछ लोग 
चंद सिक्के फ़ेककर 
फ़ुसला रहे हैं ।
अवनी की रत्न-राशि लूटते 
पृष्ठ को पुष्ट करते 
प्रजातंत्र में राजतंत्र का 
भोग लगा रहे हैं।

जागो!
हे ! हिंद वासियों,
पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

समता को मिटा 
विषमता को फैला रहे 
ये वही है जो...
मौलिक अधिकारों का गला घोटते
निरंतर घोटाले किए जा रहे।

पर कौन...!?
स्वयं सोचे और विचारें ।।
कि आख़िर कौन  है जो...
समाधान और व्यवधान के 
बीच के अंतर को मिटा रहे हैं 
पुण्य भूमि को युद्धभूमि
बना रहे हैं...। 

जागो!
हे ! हिंद वासियों,
पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

क्योंकि 
जागरण ही एक निदान है 
तभी होता कर्तव्यों का ज्ञान है। 

अभिमान  हो  देश का केवल 
अधिकारों का ऐसा भान लिए ।

सबका सबसे रहे अनुराग 
भ्रष्टाचार जाए भाग 
शिक्षा,ज्ञान साथ में दान 
जीवट मन आभार लिए ।

जागो!
हे ! हिंद वासियों,
पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र - साभार गूगल 

Thursday, 21 January 2021

निशा का एक पहर अभी बाकी है...

गतिमान पथिक
हम दोनों
और प्रभाकर का 
तेज... प्रबल 
शिकन धुले 
कुछ थकान लिए
अविरल,अविचल,अथक,सबल ।

गरल-तमस को चीरता 
अधरों पर मुस्कान 
अभी ताज़ी है  
कोई राग तो अलापो...
चातक मन प्रतीक्षारत
निशा का एक पहर
अभी बाकी है...।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र-साभार गूगल  

घड़ी 🕒 की सुइयाँ उल्टी नहीं चला करतीं...!!!

समय कई जख़़्म देता है 
इसलिए 
घड़ी में फूल नहीं काटें होते हैं।
यूँ तो ...
घड़ी सुधारने वाले 
कई मिल जाएंगे 
पर... 
समय में सुधार 
ख़ुद करना होता है।
और...
इस दुनियाँ में 
कुछ भी बेमतलब नहीं... 
ये बंद घड़ी 🕒 भी 
हरदिन
दो बार सही वक़्त दिखा जाती है। 
बस...अब अमल ख़ुद करना है 
सीख अब ख़ुद लेनी है।
वे लोग
स्वयं फ़ूल बन जाते हैं 
जो समय रहते 
अपनी भूल नहीं सुधारते 
क्योंकि...
घड़ी 🕒 की सुइयाँ 
उल्टी नहीं चला करतीं...!!!

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र-साभार गूगल 

Tuesday, 19 January 2021

सबसे बड़ी भेंट

'प्रेम' और 'सम्मान'
दुनियाँ  की  सबसे बड़ी भेंट है। 
किसी को प्रेम व स्नेह देना 
जितना बड़ा उपहार है ।
उससे कहीं बड़ा 
उसे पाना साक्षात् ...
आत्मसम्मान है ।।
*************************

जिंदगी में कितना... क्या है!!! ?
यह मायने नहीं रखता 
बल्कि ...
आपके जीवन में 
कौन कितना समर्पित है!!!
यह मायने रखता है।
***************************

कुछ लोग
सीमित संसाधन में भी 
प्रफुल्लित रहते हैं...
पूर्ण रहते हैं ।
पर कुछ भरे पूरे...
खाली जीवन लिए 
सर्वदा अपूर्ण रहते हैं। 

 ।।सधु चन्द्र।। 

चित्र - साभार गूगल 

Monday, 18 January 2021

भूख इतनी न जगाओ कि ...झमाझम बारिश में भी प्यास ना बुझे ...!

ज़िंदगी का दूसरा नाम 'जिंदादिली' है। 
जो कि बा-मुश्किल लोगों को मिली है।
बिन बारिश भी जो खुद को 
सूखने ना दे, 
पतन होने न दे 
उसी का नाम हरियाली है ।
जिसके लिए स्थिरता चाहिए 
संयम, ठहराव चाहिए। 
भूख इतनी न जगाओ कि ...
झमाझम बारिश में भी 
प्यास ना बुझे ...!
अपने भीतर के पानी को 
इतना न गिराओ कि
मर्यादा  न सूझे...!
वरना ...
सूखे पत्ते की तरह गिर जाओगे ...
और कई लोग हैं 
तुम्हारे नक्श-ए-क़दम पर चलने वाले 
जो तुम्हें ढेर कर आग लगा जाएंगे।
और तुम खुद को जलता हुआ पाओगे।।

।।सधु चन्द्र।।

चित्र - साभार गूगल 

Sunday, 17 January 2021

दास नहीं हो सकता उदास ...

दुर्योधन ने श्री कृष्ण की 

पूरी नारायणी सेना मांग ली

और अर्जुन ने  

केवल श्री कृष्ण को मांगा ।

उस समय...

भगवान श्री कृष्ण ने 

अर्जुन की चुटकी (मजाक) लेते हुए कहा कि 

हार निश्चित है तेरी 

हरदम रहेगा उदास 

माखन दुर्योधन ले गया 

केवल छाछ बची तेरे पास ।

अर्जुन ने कहा- हे प्रभु! 

जीत निश्चित है मेरी 

दास नहीं हो सकता उदास 

माखन लेकर क्या करूं!!? 

जब माखन चोर है मेरे पास।।🙏🙏🙏


चित्र-साभार गूगल

 

Friday, 15 January 2021

मुफ़्तखोरी लोगों को कामचोर और देश को कमज़ोर बनाता है...

जाति विशेष पर टिप्पणी 
नहीं होनी चाहिए। 
जाति लिखी गाड़ियाँ भी सीज कर लो
अच्छी बात है !!!
पर... 
जाति प्रमाण पत्र बनाना भी तो  बंद करो। 🙏
जाति देखकर 
सरकारी सुविधा देना भी बंद करो
जनता को कुछ भी
 मुफ़्त में मत दो।
केवल शिक्षा, न्याय, इलाज ही
मुफ़्त में मिलनी चाहिए।
क्योंकि... 
मुफ़्तखोरी लोगों को कामचोर 
और देश को कमज़ोर बनाता है।

।।सधु चन्द्र।। 


बड़े नसीब से मिलते हैं..

हो आपके क़रीब
या हो आपसे दूर
पर... फ़िक्र हो जिन्हें 
हर पल आपका हुज़ुर
क़दर करें उनकी 
भावनाएँ हों ऐसी जिनकी
क्योंकि
ख़याल रखने वाले 
फ़िकर करने वाले 
इज्ज़त देने वाले 
बड़े नसीब से मिलते हैं..
कदर कीजिए ।

प्रातर्वन्दन 🙏🙏🙏💐

Thursday, 14 January 2021

मकर-संक्रांति की अनन्त शुभकामनाएँ

कर्क  से मकर में 
प्रवेश करती राशि
कई संकेतों को दर्शाती है

है सूचक यह परिवर्तन का
सभी को निद्रा से जगाती है।

यह संक्रांति विशेष है जो
तमस  की देह पर   
आलोक सूरज
का सजाता है।
खिचड़ी भोग 
कुटिया और महल
को भी मिलाता है।
दिवस की यात्रा 
लम्बी निशा को
यही घटाता है।।

दान का इसलिए है पर्व
जगे देव का व्यवहार।
गंगा तीर्थ अवगाहन पावन
संस्कृति संस्कार।।

पूर्व गोलार्ध  शनि सुत से मिलने
 आ रहे  दिनमान।
पतंगों की फुलवारी गगन
का व्यक्त ये आभार।।

मकर-संक्रांति की अनन्त शुभकामनाएँ

चित्र- साभार गूगल 

Monday, 11 January 2021

हर दिन हिंदी दिवस मनाएँगे....

तन हिंदी 
मन हिंदी 
और यह जीवन 
हिंदी हो जाए ।

गोते लगाए बस 
हिंदी में 
आ... विदेश से लौट 
फिर स्वदेशी हो जाए ।।

एक चाहत है 
जड़ों की 
बस... हिंदी से ही 
उसे सींचा जाए।
 
जन-जन की भाषा हिंदी हो 
और ...
हिंदी ही
पहली भाषा कहलाए ।

तमस मिटे 
अज्ञान का
ज्योतिर्मय 
ज्ञान बिखर जाए।

अलख जगे और गूंज उठे 
जन-गण-मन हिंदी हो जाए।

पर याद रहे... 
बस एक दिन के लिए न...
माँ के चरणों में स्थान पाएँगे
बल्कि...
हर दिन 
हिंदी दिवस मनाएँगे....


।।सधु चन्द्र।। 

चित्र-साभार गूगल 


Saturday, 9 January 2021

उन्मुक्त मन का आयतन...

उन्मुक्त मन का आयतन
उस निर्धारित परिमाप से
कहीं विस्तृत ....
जिसे नियति ने नियत किया
पर  हर  दिन उस स्वप्निल
उड़ान को जी लेती...
जिसे तुम्हें ले देखा है...।

बस 'तुम' और 'मैं' का साथ
'हम' को प्रबल बनाता है
हर जंग में जीत का
परचम फैलाता है।

निश्चय ही ...

इस विस्तृत आकाश में
बाहें फैलाए
एक- एक सोपान पर
पदार्पण कर लेंगे।
निरंतर अभ्यासरत... 
बस...एक अवसर मिले!

जड़ें मजबूत करते
गगन भी पार कर लेंगे।
अक्षर की कटारों में
समय से धार कर लेंगें।
बस...एक अवसर मिले!

छांव से नाम लिख देंगे
धूप के इज़हार में अपना
अगर होगी ज़रूरत आग
को आधार कर लेंगे।।

क्योंकि
उन्मुक्त मन का आयतन
उस निर्धारित परिमाप से
कहीं विस्तृत ....है। 

।।सधु चन्द्र।। 

Friday, 8 January 2021

ईर्ष्यालुओं को सादर नमन🙏



दुनियाँ में ईश्वर का आभार 

अभिव्यक्त करने के 

कई कारण हो सकते हैं ।

पर ... हे ! ईश्वर 

आपका विशेष आभार

कि आपने कुछ 

ऐसे उत्कृष्ट लोगों को बनाया कि

जिससे लोग बराबरी करना 

शान समझ सकें 

और नहीं तो 

उस विशेष के प्रति 

औरों का समर्पण देख 

द्वेष-ईर्ष्या कर सकें।

ताकि उन ईर्ष्यालु विशेष

पैंतीस आर-पार में भी

तीव्र हार्मोनल परिवर्तन हो सके । 😊

अब इनमें परिपक्वता तो 

आ नहीं सकती 

तो कम से कम ये स्वस्थ रह सकें

और निरंतर ईर्ष्या कर सकें  ।😀😀😀

अनुमानतः

वे ईर्ष्या कर यह जताते हैं कि 

वे कितने अधूरे...

कितने असंतुष्ट है.. 

और बराबरी की होड़ में 

प्रतिद्वंदिता से बहुत पिछड़े हुए हैं।

सामना करना उनके वश में नहीं 

तो चलो ईर्ष्या कर लें,

टाँग खींच दें।

उन ईर्ष्यालुओं को सादर  नमन।🙏


तुच्छ मेधा  द्वारा इनका आकलन  

कुछ इस प्रकार है ।इनमें -

निरीक्षण करना

तुलना करना

निगरानी करना

 और सबसे ऊपर

चुप रहना व दुखी होना जैसे ...

भार को ढो 

अमिट छाप  छोड़ना हैं...। 🤗


 हे ! ईश्वर 

है  ईर्ष्या रूपी अंधेरा 

अब प्रेम का प्रकाश निकलना चाहिए।

हो जिस तरह भी 

पर यह द्वेष  रूपी मौसम 

बदलना चाहिए।।🙏🙏


।।सधु चन्द्र।। 


चित्र-साभार गूगल 

Thursday, 7 January 2021

😁ज़रा हँस भी लो😛😛😛😁😁😁

😁😛                 😛😛            😁😁😁

 बहस करने से रिश्ते कमजोर होते हैं 

इसलिए!!! 

तुरंत झापड़ मार कर रिश्ते मजबूत करें।😁😁😁😛😛😛😛

नारी न सोहा नारी का रूपा ...😉

नारी न सोहा
नारी का रूपा ...😉😛

विडंबना ~~~•😛😛😛

चित्र-साभार गूगल 

टूटने और बिखरे की परिभाषा हमेशा 'समाप्त' होना नहीं होता

टूटने और बिखरे की परिभाषा 
हमेशा 'समाप्त' होना नहीं होता ।
कभी -कभी टूटने और बिखरे से 
जीवन का 'आरंभ' भी होता है।।

नदी की राह में 
चट्टान के गिर जाने से 
रास्ता बंद नहीं हुआ करता ।
कभी-कभी 
रुख मोड़ कर भी 
राह निकल जाया करती है।।

यह ना समझना कि 
यह 'अनंत
स्वयं  ही प्रभावी बना है...
हर बार 'अंत' ने 
इसे सहारा दिया है।।

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र-साभार गूगल 

Wednesday, 6 January 2021

कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोला करते हैं


इस दुनिया में 
तीन तरह के लोग हैं 
शुद्ध, अशुद्ध, मिलावटी
किंतु यह दौर है 
केवल मिलावट का।

इस मिलावट के दौर में 
कौन सच बोलता है !!!
पता नहीं। 
साक्षात् दिखने वाले
कपड़े और चेहरे 
अक्सर झूठ  बोला करते हैं ।
इनके साथ 
हाँ में हाँ मिलाने वाले की भी 
कमी नहीं 
खैर!!! 
मनुष्य की वास्तविकता तो 
समय ही बताता है।
अगर हम 
अपने बीते हुए कल के
हर एक क्षण से 
कुछ -कुछ नया 
सीखना शुरू कर दे 
तो ...
आने वाले कल के 
हर एक पल को ...
खुशहाल बना सकते हैं
सौगात बना सकते हैं।।

।।सधु चन्द्र।। 




 


Tuesday, 5 January 2021

मेरे ज्ञान का हो यह प्रतिफल ...

जीवन का एक ही उद्देश्य है 
एक ही लक्ष्य ~~
मेरी शिक्षा, 
मेरे ज्ञान का हो यह  प्रतिफल 
कि याद करे दुनिया ,
मेरे बाद भी मुझे कल।
ना मेरा चेहरा
न मेरी बातें 
उन्हें याद रहे बस...
 मेरा काम  मेरी यादें!!!

।।सधु चन्द्र।। 

Monday, 4 January 2021

धुली-धुली नई सुबह से हाथ मिला लो

धुली-धुली
नई सुबह से 
हाथ मिला लो।
पिछली वाली 
काली-काली
रात भुला दो।

जगी उमंगे हैं
 फिर से... 
उल्लासों से 
उन्हें  सजा दो ।
चूर-चूर  जिससे
तन-मन था वो
आघात भुला दो।

कलुष झरें 
किसलय अनुरागी
कन्ठ लगा लो।
नाराज़ी की ऊँची-नीची
बात  भुला दो।

अभिनन्दन यूँ करें परस्पर
नये वर्ष का
फटे-फटे रिश्तों की हर
सौगात भुला दो।।
शुभकामनाएँ
प्रातर्वन्दन 🙏🙏🙏🙏

Sunday, 3 January 2021

हवा पर दस्तख़त की किसी ने ...

हृदय उर्मियों का विस्तार 
हो रहा दूर-दराज़ 
फिर हवा के झोंकों में
हो विलीन 
जल से करता एकाकार ।

कि आज दस्तक दी किसी ने 
हवा पर दस्तख़त की किसी ने ।।

उन्मुक्त गगन में 
चंचल मन 
उड़ता जाता क्षितिज पार ।
अंतस से उठती तरंग 
तेज गति से ...
चाप पर न पाता नियंत्रण 
बारम्बार ।
आरोह-अवरोह 
पर लगा टेक
मनोभाव बना देता 
सामान्य को कलाकार 

कि आज दस्तक दी किसी ने 
हवा पर दस्तख़त की किसी ने ।।

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र - साभार गूगल 


Friday, 1 January 2021

नया साल है...


आरंभ का अंत 

और 

अंत से आरंभ हो जाना 

नया साल है।


दिन का रात 

और 

रात का दिन हो जाना 

नया साल है ।


उदय का अस्त 

और

अस्त का उदय हो जाना 

नया साल है।


टहनियों पर 

खिले फूल का झड़ जाना 

और 

उन्हीं  झड़े फूलों की जगह 

एक नई कली का खिल जाना 

नया साल है ।


आत्मा का 

निश्चित रह जाना और 

शरीर रूपी वस्त्र का

 बदल जाना

नया साल है ।


तो आओ ...

एक बताशे-सी मुस्कान 

इन लबों पर ले आए।

मुंह मीठा खुद करें 

दूसरे भी बस ~~~

मीठे-मीठे हो जाएँ।

मंगलमय नववर्ष की अशेष शुभकामनाओं सहित 

।।सधु चन्द्र।। 

Wednesday, 30 December 2020

नववर्ष का करने कल्याण... हे शिव! मानव रूप धर तुम धरा पर कब आओगे?

ज्ञान की दुशाला तान 
अवचेतन का रखते मान 
नववर्ष में... 
अवशेषजन का करने कल्याण
हे शिव! मानव रूप धर तुम धरा पर कब आओगे?

अपने डमरू में ले डंकार 
राम-धनुष पर चढ़ा टंकार  
तिमिर में ज्योत कब जगाओगे? 
हे शिव! मानव रूप धर 
तुम धरा पर कब आओगे? 

भस्मासुर की भरी प्रजातियाँ 
मिला जिन्हें नेता का नाम 
 जोर-शोर से छल-प्रपंच का 
चल रहा यहाँ, सरोकार का काम
 हे देव सोचो !!

जनता क्यों न मचाए हाहाकार 
जब उनपर हो रहा अगाध अत्याचार।

नितदिन हो रही 
पावन गंगा की कलुषित गात 
धृष्ट अभिलाषाएँ ...न सुने बात 
विह्वल मन बस तुम्हें पुकारे ।
सुप्त जग को कब 
जगाओगे जग आओगे।।

हे शिव! मानव रूप धर 
तुम धरा पर कब आओगे?


छद्ममयी दुरात्मा का 
शीघ्र हो नाश 
बालमन मानव के बस 
तुम्हीं एक आस

हृदय कहता निश्चय ही... 
मानव रूप धर
इस नववर्ष में...
धरा पर आओगे
निश्चय ही 
धरा पर आओगे।।

मंगलमय नववर्ष की अशेष शुभकामनाएँ ✨✨💐💐

।।सधु चन्द्र।। 

चित्र-साभार गूगल 

Tuesday, 29 December 2020

ममता की छाँव में

ममता की छाँव में कोमल तल-झाड़ियाँ भी बने शूल।
माँ तेरी ही अनुकंपा है जो 
विपरीत परिस्थिति में भी
सब  हो जाए अनुकूल।।
प्रातर्वन्दन🙏🙏🙏
।।सधु।। 

चित्र - साभार गूगल

यूँ हँस-हँस कर क्यों सुनाते हो!


मेरी बीती बात ज़माने को
यूँ हँस-हँस कर 
क्यों! सुनाते हो।
मैं जो हंस दूंगा... 
तो तुम रो दोगे।।

।।सधु चंद्र।। 

सर्वाधिकार

Monday, 28 December 2020

मरण या स्मरण!

स्वयं के लिए 
जीने वाले का 
'मरण' होता है ।
दूसरे के लिए 
जीने वाले का तो 
हमेशा ही 'स्मरण' होता है।

'प्राप्त' को 'पर्याप्त' समझने वाला ही
संतोषी 'सुखी' होता है
वरना..
ज़्यादा और ज़्यादा के 
ज़हरीले भूख में 
इंसान अक्सर 'दुखी' होता है।


Saturday, 26 December 2020

हमारी आवाज हमारे मनोभाव की उपज...

हमारी आवाज
हमारे मनोभाव की उपज है।
 हम जैसा सोचते हैं 
वह विचार बनकर 
हमारे शब्दों के माध्यम से 
अभिव्यक्त होता है।

यदि भीतर क्षमा हो 
तो क्षमा निकलेगी ।
और यदि भीतर 
क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या,अहंकार 
रूपी आडंबर,गंदगी भरी है
तो जिह्वा मूल से वही निकलेगी ।

इसलिए 
जब भी कुछ बाहर निकले 
तो उसका दोष 
किसी और पर न मढ़ें...
क्योंकि यह हमारी ही थाती है 
जिसको हम अपने भीतर छुपाए बैठे हैं।।

केवल ऊँचा मकान बनाने से 
कोई ऊँचा नहीं होता ।

 केवल बड़ी गाड़ी लेकर 
बड़ी-बड़ी बातें करके
कोई बड़ा नहीं होता।

 उसकी सोच,उसके विचार 
उसके ऊँचे एवं बड़े होने का
 निर्धारण करते हैं।

अगर ऊँची रखनी हो तो 
सोच ऊँची रखनी चाहिए
 ना की आवाज।
 क्योंकि आवाज ऊंची होगी 
तो कुछ लोग सुनेंगे 
पर बात ऊँची होगी 
तो बहुत लोग सुनेंगे।

।।सधु चन्द्र।। 

Friday, 25 December 2020

पंडित के घर ईसा मसीह का अवतार।

तुम्हारा जन्म में एक उत्सव है
जन्म का क्षण...
धर्मनिरपेक्षता रूपी उपहार
जहाँ पंडित के घर हुआ,ईसा मसीह का अवतार।

आज दहाई में 
प्रवेश कर गए तुम। 
अपनी ख़ुशियाँ 
बयाँ नहीं कर सकती
जो...
स्मृतियों की 
उन पीड़ाओं से 
कहीं ऊपर है
जिसे पहली बार 
तुम्हे स्पर्श व आलिंगन से मिली।

युग-युग जियो मेरे लाल !

तुम ही हो 
कल के कर्णधार 
तुम कीर्ति हो,पर्व हो...
ज्योति हो ज्वाला बनो।
उज्ज्वलता का वेश धरो।

देश के उत्तराधिकारी हो
न तुम थमों, न तुम रुको 
प्रपञ्च में न तुम पड़ो
 चले चलो, चले चलो 
आगे बढ़ो, बढ़े चलो....... 

तुम्हारी माँ
।।सधु चन्द्र।। 

Wednesday, 23 December 2020

बस विमर्शों में आग🔥 लगकर क्या होगा ?

मैं न ही कोई पत्रकार 
न ही मिडिया से है साठ-गांठ 
आवाम की दबी-कुचली आवाज़
मैं आपको  सौपती हूँ।

क्योंकि...

मैं आग बेचती हूँ
न कि राख बेचती हूँ।

यदि राख भी बेचा 
तो समझना कि आग है बेचा
बूझे आग में सुलगा हुआ
राख बेचती हूँ ।
हाँ ! मैं आग बेचती हूँ

आवाम की दबी-कुचली आवाज़
मैं आपको  सौपती हूँ।

जहाँ आग 🔥 तो लगी है 
पर राख न दिखा 
जो कुछ स्वाहा हुआ 
उसपर अख़बार ख़ूब बिका।

पर जो... 
अधजला कचरे का अंबार 
अब भी था... कोने में 
उसे उठाने वाला 
सिलसिलेवार ना दिखा।
 
फ़ायर ब्रिगेड वाले भी आए थे 
तप्त-अग्नि को शांत करने 
पर... राख के भीतर का उन्हें, 
अनबुझा,उद्दीप्त
आग न दिखा ।

पसरा सन्नाटा 
यहाँ भी लोलुपों के नाम चढ़ा 
सत्ताधारियों एवं 
समाज सुधारकों का चिट्ठा 
यहाँ ख़ूब बिका।

मुँह दबाकर रो रही थी
अधजली वस्तुएँ
उन्हें सुनने वाला 
कोई विश्वविधाता न दिखा। 

सुना है!
आजकल 
ख़ूब आग लगती है 
विमर्शों  में।
हाँ विमर्शों में ...

पर, बस विमर्शों में 
आग🔥 लगकर क्या होगा ?
आग तो लगनी चाहिए 
सबके सीने में 

महज़ ...
सीने की आग ही
एक ढर्राए पिरामिड को 
भस्म कर
फिर से खड़ा कर सकती है
एक सपनों का महल ।।

क्योंकि... कागजी दस्तावेज एवं वास्तविक इमारत में 
सपने और हक़ीक़त सा ही फ़र्क है।

।।सधु।। 

Tuesday, 22 December 2020

यह वक़्त का ही खेल है कि जिसने परखना और समझना सीखा दिया...

अपने  जैसा ढूंढते-ढूंढते 
जमाना निकल गया 
कुछ अपने 
पराए बन गए 
कुछ पराए 
अपने ।

यह वक्त का ही खेल है 
कि जिसने
परखना और समझना 
सीखा दिया।
परखा तो 
कोई 
अपना ना दिखा 
और...
समझा तो 
कोई पराया ना दिखा।

बस ज़िंदगी ने 
यही सिखाया है कि 
जबरन की डोर 
ना बांधे चलो।
कदर ना हो तो 
चुपचाप 
दूरी बना लो 
और निकल चलो 
अपने मकान पर।

।।सधु चन्द्र।। 


Monday, 21 December 2020

रंग-बिरंगे सजीले सपने

रंग-बिरंगे सजीले सपने 
कभी आंखो के भीतर से 
झांकते, 
इधर-उधर 
कभी अभ्यासरत 
ढुलक जाते 
आंखों की कोरों से 

जिन्हें सहेज 
अंक में ले 
वापस भरने वाला 
समर्थवान 
कोई नहीं।

कभी ये सपने 
शून्य में जागते 
धैर्य के साथ 
इंतजार में 
वापस होने के लिए ।

अपने प्रस्ताव की 
किलकारियों
अठखेलियों को
गति में देखने के लिए 
उस सुखद एहसास को

जो...
भाप बनकर उड़ गए 
आकाश में 
और बन गए बादल ।

आज वह  बादल  
उमड़ घुमड़ रहे 
सिर के ऊपर 
आकाश में...

मन होता कि भीग जाए 
उस बारिश में ...
जो मेरी सौजन्य से 
ऊपर तक बादलों का ढेर बना पाए हैं ।

और जिसे 
निरंतरता देने में 
अभ्यासरत रही...!

पता है कि ये 
कुछ आस-पास छटकेंगे
पर...
कुछ तो कभी बरसेंगे...!
और तृप्त करेंगे सपने को।

इसी चाह में
यह चातक मन 
उसे अपलक देख रहा है।।


।।सधु चन्द्र।।

हमने मौत से लड़कर जीवन जीतना सीखा है।।

उड़ान हौसलों की  ना हो कभी कम  इस आसमां को पी जाएं भर लें बाजुओं में  हवाओं के दम ।।  ऊंची लहर तुम  उठो और ऊँचा   गिरो त...