मानव नव रसों की खान है। उसकी सोच से उत्पन्न उसकी प्रतिक्रिया ही यह निर्धारित करती है कि उसका व्यक्तित्व कैसा है ! निश्चय ही मेरी रचनाओं में आपको नवीन एवं पुरातन का समावेश मिलेगा साथ ही क्रान्तिकारी विचारधारा के छींटे भी । धन्यवाद ! ।।सधु चन्द्र।।
वो खुद संगीत थी और संगीत कभी नहीं मरता।नमन।समय साक्षी रहना तुम by रेणु बाला
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अश्रुपूरित नमन स्वर साम्राज्ञी को 🙏😞🙏😞🙏😞🙏🙏
वाह! सटीक सत्य।
सादर नमन।
सादर
सादर नमन ।
सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु । सर्व: कामानवाप्नोतु सर्व: सर्वत्र नंदतु । " सब लोग कठिनाइयों को पार करें, कल्याण ही कल्या...
वो खुद संगीत थी और संगीत कभी नहीं मरता।
ReplyDeleteनमन।
समय साक्षी रहना तुम by रेणु बाला
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ReplyDeleteअश्रुपूरित नमन स्वर साम्राज्ञी को 🙏😞🙏😞🙏😞🙏🙏
ReplyDeleteवाह! सटीक सत्य।
ReplyDeleteसादर नमन।
ReplyDeleteसादर
ReplyDeleteसादर नमन ।
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