बल्कि...
ज़ुुुुल्म की शुरुवात है!!!!
मानव नव रसों की खान है। उसकी सोच से उत्पन्न उसकी प्रतिक्रिया ही यह निर्धारित करती है कि उसका व्यक्तित्व कैसा है ! निश्चय ही मेरी रचनाओं में आपको नवीन एवं पुरातन का समावेश मिलेगा साथ ही क्रान्तिकारी विचारधारा के छींटे भी । धन्यवाद ! ।।सधु चन्द्र।।
सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु । सर्व: कामानवाप्नोतु सर्व: सर्वत्र नंदतु । " सब लोग कठिनाइयों को पार करें, कल्याण ही कल्या...
प्रतिशोध ज़ुुुुल्म का अंत नहीं
ReplyDeleteबल्कि...
ज़ुुुुल्म की शुरुवात है!!!! क्या बात कही सधु जी | सचमुच क्षोभ से प्रतिशोध तक पहुंची बात ही तो महाभारत रचवाती है |
सचमुच क्षोभ से प्रतिशोध तक पहुंची बात ही तो महाभारत रचवाती है |
Deleteबिल्कुल
सत्य वचन
ReplyDeleteआभार!
ReplyDeleteसादर